सड़क हादसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने जयपुर-दिल्ली हाईवे पर लेन सिस्टम लागू किया। दावा भी किया कि नियम फॉलो करवाने के लिए 7 दिन में ही 8,947 चालान किए। इनमें 6,956 चालान गलत लेन के थे। साथ ही ओवरस्पीड के 1,873 और रॉन्ग साइड के 118 चालान भी शामिल हैं। भास्कर रिपेार्टर ने एक्सपर्ट किशोर कुमावत के साथ मिलकर बगरू से चंदवाजी तक 70 किमी एक्सप्रेस-हाईवे पर साइड-लेन हो रहे लेन सिस्टम की पड़ताल के लिए कार पर 360 डिग्री कैमरा लगाकर पूरा रूट देखा। हालात ऐसे थे कि 14 नंबर वीकेआई में ही सर्विस लेन में ट्रक सर्विस होते मिले। वहीं, लाइट व्हीकल यानी कार लेन में ट्रक चल रहे थे। जगह नहीं मिलने पर सवारियां हाईवे के बीच ही बस का इंतजार करती दिखीं। 200 फीट बाईपास से चंदवाजी तक 40 किमी का एक्सप्रेस-वे लेन सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन भास्कर ने जांच में पाया कि यहां कहीं भी लेन मार्किंग नहीं है। लेन सिस्टम लागू करने के लिए लगे साइन बोर्डों पर लिखे 8 नियमों की लिखावट इतनी छोटी है कि 75 मेगापिक्सल कैमरा भी 15 फीट की दूरी से नियम नहीं पढ़ पा रहा। 80/60 किमी की स्पीड से दौड़ते चालक नियमों को कैसे पढ़ पाएंगे? लाइट व्हीकल लेन; लाइट व्हीकल ओवरटेकिंग कर सकते हैं और इमरजेंसी वाहन इसी लेन से गुजरते हैं।
हकीकत; भारी वाहन तेजी से चल रहे भारी वाहन लेन; धीमी गति से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इस लेन पर भारी वाहन चलने चाहिए।
हकीकत; सवारियां खड़ी मिलीं। छोटे वाहन, बसें चल रहीं सर्विस लेन; धीमी गति के वाहन और बाइक सवार चलते हैं। लेफ्ट यू-टर्न लेने वाले भी यहीं से निकलते हैं।
हकीकत; ट्रकों की सर्विस होती दिखी 90% भारी वाहन बायीं लेन छोड़कर पहली-दूसरी लेन में चलते मिले…
