बाजार में औसतन 45 से 50 रुपए प्रति लीटर दूध के दाम, इतनी कम राशि में आधा किलो दूध भी आता मुश्किल सेपुरुषोत्तम झा. हनुमानगढ़. महंगाई दिनोंदिन आसमान छू रही है। लेकिन अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए पालनहारों को सरकार स्तर पर दी जाने वाली राशि में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि जितनी राशि सरकार स्तर पर पालनहारों को दी जा रही है, उतने में तो बच्चों को आधा किलो पौष्टिक दूध मिलना भी संभव नहीं। इस स्थिति में अनाथ और बेसहारा बच्चों को पाल रहे ‘पालनहारों’ की हिम्मत को निश्चित तौर पर सराहनीय कह सकते हैं। परंतु जिस तरह से महंगाई का ग्राफ बढ़ रहा है, उसे देखते हुए भविष्य में इन पालनहारों की हिम्मत कहां तक साथ निभाएगी, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।जरूरी है कि सरकार आगामी बजट में पालनहार योजना में देय राशि में बढ़ोतरी करे। ताकि योजना में चयनित इन बच्चों का परवरिश बेहतर तरीके से हो सके। लेकिन गत दो दशक की बात करें तो सरकारी योजनाओं में दी जाने वाली राहत राशि को बढ़ाने की तरफ सरकारी तंत्र का ज्यादा ध्यान नहीं गया है। गत गहलोत सरकार ने जाते-जाते इस राशि में मामूली बढ़ोतरी जरूर की थी। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने दो वर्ष में इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया है।आगामी राज्य बजट को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्कीम में देय राशि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर कुछ समाजिक कार्यकर्ता मुखर हो रहे हैं। हाल ही में राज्य बजट को लेकर संवाद करने आए हनुमानगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा के समक्ष सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पालनहार योजना की राशि बढ़ाने तथा मंदबुद्धि वर्ग के बच्चों को पालनहार स्कीम में जोडऩे का सुझाव भी दिया। अब देखना है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाती है। हनुमानगढ़ जिले में 10862 बच्चे पालहार योजना में शामिल हैं। सरकार आगामी बजट में उक्त योजना में दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी करती है तो निश्चित तौर पर जिला सहित प्रदेश में इस योजना में शामिल लाखों बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।
