पंजाब और राजस्थान के वन विभागों ने आपसी तालमेल का शानदार उदाहरण पेश करते हुए इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) से 12 फीट लंबे एक विशालकाय वयस्क घड़ियाल का सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया है। लगभग पांच महीनों से लगातार निगरानी में रखे गए इस घड़ियाल को राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहानगढ़ क्षेत्र से सुरक्षित पकड़ा गया। वर्तमान में इसे पंजाब के छतबीड़ चिड़ियाघर (Chhatbir Zoo) लाया गया है, जहां स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इसे ब्यास नदी संरक्षण रिजर्व में छोड़ा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस घड़ियाल को सबसे पहले 13 मार्च 2026 को श्रीगंगानगर जिले के पास इंदिरा गांधी नहर में तैरते हुए देखा गया था। अगले ही दिन राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पंजाब वन विभाग से विशेषज्ञ सहायता मांगी। हालांकि, नहर में पानी की अत्यधिक गति और घड़ियाल के बार-बार स्थान बदलने की वजह से शुरुआती दौर में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन सफल नहीं हो सके। मई और जून के महीनों में भी इसे कई जगह देखा गया, लेकिन पानी का स्तर अधिक होने से अभियान को रोकना पड़ा था। 27 जुलाई को मोहानगढ़ माइनर में मिला मौका लंबी प्रतीक्षा के बाद 27 जुलाई को जब जैसलमेर के मोहानगढ़ माइनर में पानी का स्तर अनुकूल हुआ, तो दोनों राज्यों के विशेषज्ञ वन्यजीव अधिकारियों की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घड़ियाल को सुरक्षित जाल में ट्रैप कर लिया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इसे प्राथमिक चिकित्सा जांच के बाद सुरक्षित तरीके से विशेष वाहन द्वारा छतबीड़ चिड़ियाघर पहुंचाया गया। ब्यास नदी में घड़ियालों के कुनबे को मिलेगी मजबूती पंजाब वन विभाग के अनुसार, ब्यास नदी संरक्षण रिजर्व में पहले भी 94 किशोर (Juvenile) घड़ियालों को सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका है, जिनके सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रजनन आयु (Adult) वाले इस नर घड़ियाल को ब्यास नदी में छोड़े जाने से वहां घड़ियालों की घटती-बढ़ती आबादी को जैविक रूप से और मजबूती मिलेगी। अंतरराज्यीय सहयोग की मिसाल दोनों राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन पंजाब और राजस्थान के बीच अंतरराज्यीय समन्वय और साझा प्रयासों का एक अनूठा उदाहरण है। भविष्य में भी इस तरह का तालमेल संकटग्रस्त (Critically Endangered) प्रजातियों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा।
