मानसिक विक्षिप्त होने के कारण अपनों से तिरस्कार मिलने के कारण वर्षों से अपनाघर में रहने वाले महिला प्रभुजन व पुरुष प्रभुजन के जीवन में एक बार फिर से रंगत आने वाली है। देश में पहली बार अपनाघर प्रभुजनों का पुनर्विवाह कराने जा रही है। इसके साथ ही उनके गृहस्थ जीवन में उनके सिर पर छत हो इसके लिए 50 फ्लैट तैयार कराए हैं, जिसका नाम आशियाना रखा है। 12 फरवरी को आशियाना का उद्घाटन कराया जाएगा। वहीं, ज्यूडिशियल परमिशन मिलते ही प्रभुजनों को पुनर्विवाह करा दिया जाएगा। 25 वर्ष पहले अपनाघर की नींव रखी गई थी। एक प्रभुजन ( मानसिक रोगी) से डॉ. बीएम भारद्वाज व उनकी पत्नी माधुरी भारद्वाज ने मिलकर ऐसे लोगों की सेवा करने के संकल्प लिया था। वर्तमान में 6000 से भी अधिक प्रभुजनों की देखरेख करने से लेकर हर जरूरत का ख्याल अपना घर संस्था कर रही है। संस्था ने कई कीर्तिमान हासिल किए है उसी कढ़ी में समाज में उपेक्षित और अकेलेपन का जीवन जी रहे प्रभुजन बुजुर्गों के लिए ‘अपना घर’ संस्था मानवीय पहल शुरू करने जा रहा है। संस्था अब अपने परिसर में रह रहे महिला एवं पुरुष प्रभुजनों का पुनर्विवाह कराएगी और विवाह के बाद उनके सम्मानजनक जीवन, आवास और रोजगार की पूरी व्यवस्था भी स्वयं करेगी। संस्था संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज बताते हैं कि इस उद्देश्य के लिए संस्था की ओर से 50 फ्लैट का विशेष आवासीय परिसर तैयार किया गया है, जहां पुनर्विवाह के बाद प्रभुजन दंपतियों को सुरक्षित और आत्मसम्मान से भरा जीवन मिलेगा। ‘अपना घर’ संस्था पुनर्विवाह की सामाजिक प्रक्रिया से लेकर उनके रहने, आजीविका, स्किल डेवलपमेंट और आत्मनिर्भरता तक की समस्त जिम्मेदारी निभाएगी, जिससे वह आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें। 12 फरवरी को आशियाना का उद्घाटन प्रभुजनों को बबीता गुलाटी ने बताया कि प्रभुजनों का पुनर्विवाह कराने के बाद उनको पूरी फैमिली बनाकर दी जाएगी। हर फैमिली में उनको एक बच्चा और एक अम्मा, एक बाबा की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। ये 2 बीएचके फ्लैट में उनके साथ ही रहेंगे, जो प्रभुजन बच्चे की देखभाल की स्थिति में नहीं होंगे उन्हें 1 बीएचके फ्लैट में रखा जाएगा। यहां उनकी जरूरत की हर चीजें मुहैया कराई जाएंगी जिससे उनके जीवन में फिर से खुशहाली आए।