जयपुर के आमेर महल में करीब 400 साल पुरानी जल संग्रहण प्रणाली का अब खुलासा हुआ है। महल के सबसे प्राचीन हिस्से मानसिंह महल में बारादरी के ठीक नीचे वर्षा जल संग्रहण का टांका मिला है। पुरातत्व विभाग को इसका पता चलने पर इसका संरक्षण और नवीनीकरण किया गया है, जिसे अब टूरिस्ट भी अंदर जाकर देख सकेंगे। यह टांका इस बात का प्रमाण है कि सदियों पहले भी राजस्थान के राजा पानी के महत्व को समझते थे और महलों की बनावट में ही जल संरक्षण की व्यवस्था विकसित करते थे। बरसात का पानी सहेजने के लिए पारंपरिक वास्तुकला में कितनी बारीक योजना बनाई जाती थी। महल की छतों, खुले गलियारों और चौकों पर गिरने वाला बारिश का पानी विशेष जल निकासी व्यवस्था के जरिए भूमिगत टांके तक पहुंचाया जाता था। इस संरचना को सामने लाने और पर्यटकों के अवलोकन के लिए तैयार करने में आमेर महल अधीक्षक डॉ. राकेश छोलक, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अभियंताओं और मानसिंह महल में संरक्षण का काम कर रही फर्म मेसर्स विपांशु एंटरप्राइजेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बारादरी के नीचे छिपी थी जल संरक्षण की व्यवस्था आमेर महल के संरक्षण के काम के दौरान मानसिंह महल के चौक में स्थित बारादरी के नीचे बने टांके के बारे में जानकारी सामने आई। महाराजा मानसिंह प्रथम के समय से जुड़ी इस ऐतिहासिक संरचना को महल की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। मानसिंह महल 16वीं शताब्दी के अंतिम सालों में विकसित हुआ था और आज भी आमेर महल के प्राचीन हिस्सों में शामिल है। संरक्षण के काम के दौरान बारादरी के पूर्वी हिस्से की पाथ-वे जैसी संरचना के पत्थरों और पट्टियों को हटाकर नीचे मौजूद टांके को सामने लाया गया। इसके बाद इसकी बनावट, पानी के प्रवाह और जल निकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझने का अवसर मिला। अब इस संरचना को टूरिस्ट को दिखाने की तैयारी की गई है, ताकि आमेर आने वाले लोग महल की सुंदरता के साथ-साथ उसकी उपयोगी और तकनीकी विशेषताओं को भी जान सकें। छतों और गलियारों का पानी पहुंचता था भूमिगत टांके तक मानसिंह महल के इस टांके की सबसे खास बात इसकी जल संग्रहण प्रणाली है। महल की छतों, खुले गलियारों और चौकों पर गिरने वाला बरसात का पानी निर्धारित रास्तों से होकर टांके तक पहुंचता था। पानी को एकत्रित करने के लिए भूमिगत संरचना बनाई गई थी, जबकि पानी के साथ आने वाली मिट्टी और अन्य कचरे को अलग करने के लिए भी विशेष व्यवस्था मौजूद थी। चार शताब्दी पुरानी तकनीक में दिखती है आधुनिक सोच आज वर्षा जल संग्रहण के लिए छतों से पानी को पाइपों के माध्यम से भूमिगत टैंकों या रिचार्ज पिट तक पहुंचाया जाता है। आमेर महल की यह ऐतिहासिक संरचना भी इसी मूल विचार पर आधारित थी। अंतर केवल इतना था कि उस दौर में आधुनिक पाइपों और मशीनों की जगह पर भवन की बनावट, ढलान, नालियों और मोरियों का इस्तेमाल किया जाता था। महल की छतों और खुले हिस्सों को इस तरह जल संग्रहण व्यवस्था से जोड़ा गया था कि बरसात के पानी को एक जगह पर एकत्रित किया जा सके। पानी के साथ आने वाली मिट्टी को अलग करने और टांके की सफाई के लिए बनाई गई व्यवस्था इस प्रणाली को और उपयोगी बनाती थी। यह संरचना उस समय के कारीगरों और वास्तुकारों की व्यावहारिक समझ को सामने लाती है, जिन्होंने महल की सुंदरता के साथ दैनिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा। संरक्षण के बाद टूरिस्ट को मिलेगी नई ऐतिहासिक जानकारी आमेर महल आने वाले पर्यटक अब तक मुख्य रूप से इसके राजसी भवनों, प्रांगणों, चित्रकारी, बारादरियों और स्थापत्य को देखने के लिए पहुंचते रहे हैं। मानसिंह महल के नीचे स्थित इस टांके के पर्यटकों के लिए उपलब्ध होने से महल के इतिहास का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आएगा। यहां आने वाले लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि ऐतिहासिक महलों में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किस तरह की व्यवस्थाएं बनाई जाती थी। इस संरचना का संरक्षण आमेर महल की विरासत को समझने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इससे ऐतिहासिक भवनों के उन हिस्सों पर ध्यान जाता है, जो आमतौर पर दिखाई नहीं देते, लेकिन उनके संचालन और रखरखाव में अहम भूमिका निभाते थे। महल की बारादरी के नीचे मौजूद टांका इसी छिपी हुई विरासत का उदाहरण है।