राजस्थान क्राइम फाइल में आज 36 वर्ष पुराना केस। हनुमानगढ़ में तीन भाइयों का परिवार। आधी रात को एक भाई के परिवार के चार लोगों की हत्या हो जाती है। हत्यारा फरार हो जाता है। अन्य भाई जब सुबह उठते हैं तो देखते हैं कि 4 सदस्य दम तोड़ चुके होते हैं। 2 को गंभीर हालत में हॉस्पिटल ले जाया जाता है। हर कोई हैरान था कि ऐसी क्या दुश्मनी थी कि पूरे परिवार पर हमला कर दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…… 8 अगस्त 1990 की अल सुबह हनुमानगढ़ के रहने वाले दलीप राम ने देखा कि उसके ही पड़ोस में रहने वाले उसके भाई राजीराम की बेटी दर्द से चिल्ला रही थी। राजीराम की पत्नी भी तड़प रही थी। यह देख उसके होश उड़ गए। राजीराम की बेटी सुदेश की गर्दन पर धारदार हथियार से वार किया गया था। राजीराम की पत्नी फुला देवी भी गंभीर घायल थी। अंदर आंगन में देखा तो राजीराम के दोनों बेटे लहूलुहान थे। राजीराम भी जख्मी था। उनकी बुआ का गला भी धारदार हथियार से रेता हुआ था। दलीप चिल्लाया और पहले अपने घर वालों और फिर गांव वालों को इकट्‌ठा किया। आस-पास से सभी लोग वहां पहुंचे। लोगों ने राजीराम की पत्नी फूला और बेटी सुदेश को हॉस्पिटल पहुंचाया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। राजीराम, उसके बेटों नरेश, रमेश और बुआ निको पाई का शव मॉर्च्युरी में रखवाया। हर कोई एक-दूसरे से यही सवाल करता नजर आया कि तीनों भाइयों का परिवार बहुत प्रेम से रहता था। राजीराम का व्यवहार तो सबसे अच्छा था। सभी मिलनसार थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि राजीराम के पूरे परिवार पर किसी ने जानलेवा हमला कर दिया। दलीप राम ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। न ही कोई झगड़ा था। रात नौ बजे तीनों भाई और उसकी बुआ साथ बैठे बतिया रहे थे। पूरे परिवार ने साथ में खाना खाया और फिर सोने चले गए। दलीप राम ने बताया कि राजीराम को किसी से जान का खतरा नहीं था। न ही घर में कोई लूट हुई है। पूरे मामले में सिर्फ एक बात अजीब थी। वारदात के बाद से दलीपराम का तीसरा भाई सुरजाराम नजर नहीं आ रहा था। हर किसी को ये बात खटक रही थी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि सुरजाराम की पत्नी इमरती वहीं थी, लेकिन उसे उसके पति के बारे में कुछ पता नहीं था। पुलिस को शक हुआ कि तीसरा भाई सुरजाराम सुबह–सुबह कहां जा सकता है। सुरजाराम का वहां नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा था… कल राजस्थान क्राइम फाइल्स, पार्ट–2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…