बालोतरा | तेरापंथ की यशस्वी आचार्य परंपरा के नौवें पटधर गणाधिपति गुरुदेव तुलसी के दीक्षा के 100 वर्ष के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन मे तेरापंथ महिला मंडल की ओर से आचार्य महाप्रज्ञ कृत पुस्तक धर्मचक्र का प्रवर्तन आचार्य तुलसी की जीवन गाथा भेंट की गयी। सनातन व वैदिक परंपरा में जितना महत्व तुलसी का है उतना ही महत्व आचार्य तुलसी का तेरापंथ धर्म संघ नहीं अपितु सकल जैनधर्म में है। आचार्य, गुरुदेव, युगप्रधान,अनुशास्था आदि उपाधियों के धारक तुलसी ने 22 वर्ष की उम्र में तेरापंथ धर्म संघ जैसे विशाल संघ का नेतृत्व संभाला व अपने रहते आचार्य पद का विसर्जन भी किया। मंत्री रेखा श्रीश्रीमाल ने बताया कि अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक, जैन विश्व भारती के संस्थापक, नारी शक्ति के उद्धारक आचार्य तुलसी दूरदर्शी व प्रयोग धर्मा थे।