अलवर में इंद्रेश उपाध्याय ने कहा- ताली मत बजाओ, पहले बात समझो। उपाध्याय सहजो बाई की कथा सुना रहे थे, तभी श्रद्धालु ताली बजाने लगे। इस पर उपाध्याय ने उदाहरण दिया कि जब स्कूल में शिक्षक कोई सवाल पूछता है, तो बच्चे हाथ उठाते हैं। तब शिक्षक उससे सवाल नहीं पूछता, बल्कि दूसरे से पूछता है, क्योंकि शिक्षक सोचता है कि इसे तो पहले से पता होगा। फिर जब बच्चा हर सवाल पर हाथ उठाने की आदत बना लेता है। एक बार शिक्षक उससे पूछता है, तो उसे जवाब ही नहीं पता होता, क्योंकि उसे केवल हाथ उठाने की आदत पड़ गई होती है। इसलिए बात को समझा करो, फिर ताली बजाया करो। उन्होंने कहा- इंद्रेश की कथा हो रही है तो बादल सुबह से छाए हुए हैं। कुछ ही देर में इंद्र भगवान भी आने वाले हैं। अलवर के विजय नगर ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को इंद्रेश उपाध्याय ने यह कहा। इससे पहले कथा में बुधवार दोपहर 2 बजे से भजन हुए। इसमें अलग-अलग गायक भजनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद 4 बजे से कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय कथा का वाचन कर रहे हैं। पहले देखें PHOTOS साक्षी गोपाल के दर्शन भी जरूरी
इंद्रेश उपाध्याय ने साक्षी गोपाल का उदाहरण देते हुए बताया- जैसे गंगा, बद्रीनाथ जैसे तीर्थों पर जाते हैं, वैसे ही साक्षी गोपाल के दर्शन भी जरूरी हैं। मृत्यु के बाद जब यमराज के सामने जाते हैं, तो वहां साक्षी की जरूरत होती है और साक्षी गोपाल ही हमारे लिए साक्षी बनते हैं। उन्होंने साक्षी गोपाल को पासपोर्ट से जोड़ते हुए कहा था कि जैसे विदेश यात्रा में पासपोर्ट पर मोहर लगती है, वैसे ही साक्षी गोपाल हमारे कर्मों के साक्षी होते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साक्षी गोपाल केवल भजन करने वालों के साक्षी बनते हैं, केवल घूमने के उद्देश्य से जाने वालों के नहीं। 19 मार्च को भजनों की विशेष प्रस्तुति देंगे कन्हैया मित्तल
कन्हैया मित्तल द्वारा 19 मार्च को भजनों की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं 20 मार्च को भजन गायक मोहन यदुवंशी श्याम वंदना प्रस्तुत करेंगे। साथ ही शाम की कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया जाएगा और विशेष झांकी सजाई जाएगी। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वीआईपी एंट्री की भी व्यवस्था की गई है। इनके लिए अलग से पंडाल और रास्ते बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से पंडाल और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है।