पंजाब के अमृतसर में बाढ़ प्रभावित मजदूरों और किसानों ने वामपंथी संगठनों के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तत्काल राहत राशि और मुआवजा देने की मांग की। प्रशासन पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. सतनाम सिंह अजनाला ने बताया कि बाढ़ के बाद से खेतिहर मजदूरों और छोटे किसानों की स्थिति दयनीय है। मजदूरों को दैनिक मजदूरी नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके परिवारों को दो वक्त की रोटी जुटाने में कठिनाई हो रही है। सरकार ने अभी तक प्रभावित परिवारों की सुध नहीं ली है और न ही उन्हें कोई आर्थिक सहायता दी गई है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को 1 लाख मुआवजा देने की मांग डॉ. सतनाम सिंह अजनाला ने मांग की कि सरकार प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को कम से कम एक लाख रुपए का मुआवज़ा दे, ताकि वे अपनी जिंदगी सामान्य कर सकें। उन्होंने बताया कि किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार की चुप्पी को उन्होंने अन्यायपूर्ण बताया। डिप्टी कमिश्नर के रवैये पर प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी के रवैये पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि डीसी गांवों में जाकर हालात का जायजा तो ले रही हैं, लेकिन जब पीड़ित खुद कार्यालय आकर मांग पत्र सौंपना चाहते हैं, तो वह उनसे मिलने को तैयार नहीं होतीं। इससे बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कागजों पर राहत कार्य दिखा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावित परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हैं। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुईं। सभी ने एक स्वर में सरकार से अपील की कि वह पीड़ितों के साथ भेदभाव किए बिना जल्द से जल्द राहत राशि जारी करे, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
