अदरीस खान @ हनुमानगढ़. पीढिय़ों से मजदूर और मजबूर आदमी के लिए जहां सारा संघर्ष ही दो वक्त की रोटी के लिए हो, वहां शिक्षा का दीया जलाना आसान नहीं। संघर्षों से जूझते ऐसे ही अभावग्रस्त परिवारों के बच्चों के जीवन में तालीम का चिराग जलाने में जुटी है अनौपचारिक संस्कारित पाठशाला।खासकर ईंट भट्टों व अभावग्रस्त क्षेत्र में यह पाठशालाएं चलाई जा रही है। जिले में तीन जगहों पर इन अनौपचारिक शिक्षा केन्द्रों के जरिए बच्चों को आखर ज्ञान कराया जा रहा है। उनको पाठ्य सामग्री भी दी जा रही, ताकि खर्च के डर से मजदूर अभिभावक बच्चों को पाठशाला भेजने से ही इनकार ना कर दे। गत चार वर्षों के दौरान इस मुहिम के माध्यम से 1500 बच्चों को शिक्षा दी जा चुकी है। 125 को अनौपचारिक शिक्षा देकर सरकारी विद्यालयों में नामांकन भी कराया गया है।