राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन के तहत अब गांव की बौद्धिक संपदा, कला साहित्य, मंदिर, मेले, उत्पाद और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना आसान होगा। इसके लिए आने वाले समय में पेटेंट और जीआई-टैग दिलाने जैसी कवायद की जाएगी। हाल ही में संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ” मेरा गांव-मेरी धरोहर’ के नए दिशा निर्दशों में बताया गया है कि देश के 6.5 लाख गांवों का केवल प्रशासनिक डेटा ही नहीं, बल्कि उनका ” सांस्कृतिक डीएनए’ भी डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। वे 24 जनवरी तक गांव–गांव जाकर उन अनकही कहानियों, प्राचीन मंदिरों, भूली-बिसरी लोक कथाओं और विलक्षण हस्तशिल्प को खोज निकालेंगे, जो अब तक सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थे। फिर 26 जनवरी को पूरे प्रदेश में ग्राम सभाओं में यह रिकॉर्ड रखा जाएगा। सर्वेक्षक केवल डेटा एंट्री नहीं करेंगे, बल्कि बुजुर्गों और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर गांव के ” प्राचीन नाम’ और उनके पीछे छिपे ” इतिहास’ को भी दर्ज करेंगे। इसमें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थल या कला का विवरण देते समय इंटरनेट से डाउनलोड की गई फोटो मान्य नहीं होगी। सर्वेक्षकों को मौके पर जाकर मूल फोटो और वीडियो अपलोड करने होंगे। इसमें गांव की भौगोलिक स्थिति से लेकर वहां के प्रसिद्ध व्यक्तित्व जैसे स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, ऐतिहासिक स्मारकों, उपासना स्थलों, नदियों का भी विवरण लिया जाएगा। एक बार एकत्रित किए गए रिकॉर्ड का फिर सत्यापन भी कराया जाएगा। इसमें गुमनाम कलाकारों की खोज, बुनकर, कुम्हार, गायक या लोक नर्तक जिन्हें कोई नहीं जानता, अब पोर्टल के माध्यम से वैश्विक पहचान पाएंगे। ” पारंपरिक कौशल’ और “अमूर्त विरासत’ के अंतर्गत लोक संगीत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और स्थानीय व्यंजनों को शामिल किया जाएगा। ऐसे कलाकारों का डेटाबेस बनने से उन्हें सीधे सरकारी योजनाओं, पेंशन और ऋण सुविधाओं से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही गांवों में पर्यटन बढ़ सकेगा। आजीविका में सुधार संभव होगा। 3 फरवरी को तैयार होगा फाइनल ड्राफ्ट गांवों में 24 जनवरी तक प्री-सर्वे के बाद 26 जनवरी को ग्राम सभाओं में रिकॉर्ड का अनुमोदन होगा। 3 फरवरी को फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। सरकार ने एक विस्तृत सांस्कृतिक सर्वेक्षण फार्म जारी किया है। 24 जनवरी तक अधिकारियों द्वारा फील्ड सर्वे के माध्यम से यह फॉर्म भरा जाएगा। सर्वे को ग्राम सभा से अनुमति मिलने के बाद अंतिम माना जाएगा। इसके पश्चात, ब्लॉक स्तर पर गठित एक विशेष समिति दोबारा सत्यापन करेगी। फिर MGMD पोर्टल पर देख सकेंगे।