इस विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को कानपुर में बरावफात जुलूस (मीलाद उन-नबी) के दौरान हुई, जब कुछ लोगों ने सड़क पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे बोर्ड लगाए. इसके बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे नई परंपरा बताते हुए आपत्ति जताई.