भीलवाड़ा में अंधविश्वास के कारण एक मासूम की जान चली गई। 9 महीने के मासूम को सर्दी-जुकाम और सांस लेने में परेशानी हुई तो परिजन उसे भोपे के पास ले गए। भोपे ने बच्चे को गर्म सरिए से दाग दिया। इससे बच्चे की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां 3 दिन से वेंटिलेटर पर था। शनिवार देर रात मासूम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने रविवार पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मामला भीलवाड़ा के सदर थाना क्षेत्र के इंरास गांव का है। इलाज के लिए भोपा के पास ले गए, उसने गर्म सरिए से दागा
सदर थाना प्रभारी कैलाश बिश्नोई ने बताया- देवा बागरिया का 9 महीने का बेटा गोविंद को बीमार हो गया था। उसे सांस लेने में परेशानी होने पर मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे गांव में ही एक भोपा के पास लेकर गया। वहां भोपा ने बच्चे को गर्म सरिए से दाग (डाम लगाना) दिया। इसके बाद परिजन बच्चे को घर लेकर आ गए। गर्म सरिए से दागने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई। गुरुवार को बच्चे की हालत ज्यादा बिगड़ी तो परिजन उसे महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने मासूम की हालत देख उसे तुरंत एडमिट कर लिया और इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ा
हॉस्पिटल में एडमिट होने के तीसरे दिन शनिवार देर रात बच्चे की मौत हो गई। हॉस्पिटल के ड्यूटी स्टाफ ने पूरे मामले की जानकारी हॉस्पिटल चौकी को दी। इसके बाद चौकी स्टाफ से मिली सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। रविवार सुबह शव परिजनों को सौंप दिया। थानाधिकारी बोले- भोपे के खिलाफ केस दर्ज
थाना प्रभारी ने बताया- 9 महीने के मासूम को गर्म सरिए से दागने और उसके बाद शनिवार रात इलाज के दौरान मौत होने पर भोपे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच की जा रही है। पीएमओ बोले- बच्चा को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था
पीएमओ अरुण गौड़ ने बताया- बच्चे को निमोनिया हो गया था। परिजनों ने सोचा कि डाम के बाद मासूम ठीक हो जाएगा, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। बच्चे को गंभीर हालत में भर्ती किया था, लेकिन शनिवार की रात उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा- डाम लगाने से निमोनिया ठीक नहीं होता है, उल्टा इन्फेक्शन बढ़ जाता है। पेशेंट को और दूसरी तकलीफ हो जाती है। जैसे इस पेशेंट को भी इंट्रा ग्रेन्यूलर ग्रिड हो गया और बच्चा गंभीर अवस्था में चला गया था। पीएमओ ने बताया- डाम लगाने के कारण बच्चा शॉक में जा सकता है। उसको इन्फेक्शन हो सकता है, कोई ब्लीडिंग हो सकती है। इंट्रा पेरिटोनियल या लंग्स के अंदर या ब्रेन के अंदर ब्लीडिंग हो सकती है। बच्चा बीमारी से ठीक हो सकता है, लेकिन डाम के बाद बच्चे की हालत अधिक गंभीर हो जाती है। इस केस में भी यही हुआ।